श्ववतां शौण्डिकानां च चैलनिर्णेजकस्य च । रजकस्य नृशंसस्य यस्य चोपपतिर्गृहे ।।
शिकार के लिये कुत्ते को पालने वाला; मद्य बेचने वाला, धोबी, रङ्गरेज, नृशंस (निर्दय) और जिसके घर में उपपति (स्त्री का जार बिना जानकारी के) हो वह, इनके अन्न को न खावे।
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