गवा चान्नमुपाघ्रातं घुष्टान्नं च विशेषतः । गणान्नं गणिकान्नं च विदुषा च जुगुप्सितम् ।।
गो के सूँघे हुए और विशेष रूप से किसी के लिए (अमुक के लिये यह अन्न है इत्यादि रूप से घोषित अन्न को, समूह) (शठब्राह्मण-समूह) के अन्न को, वेश्या के अन्न को और विद्वान् से निन्दित अन्न को (न खावे)।
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