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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 208
भ्रूणध्नावेक्षितं चैव संस्पृष्टं चाप्युदक्यया । ` पतत्रिणाऽवलीढं च शुना संस्पृष्टमेव च ।।
गर्भहत्या (गोहत्या, ब्रह्महत्या भी) करने वाले से देखे हुए, रजस्वला खरी से छुए (स्पर्श किए) गये, पक्षी (कौवा आदि) से आस्वादित और कुत्ते से छुए गये (अन्न को न खावे)।
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