जिस यज्ञ में ये लोग (स्री, नपुंसक, बहुयाजक आदि) हवन करते हैं वह यज्ञ-कर्म सज्जनो की श्री का नाशक और देवताओं के प्रतिकूल है। अत: उसे छोड़ देना चाहिये।
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