यमान्सेवेत सततं न नित्यं नियमान्बुधः । यमान्पतत्यकुर्वाणो नियमान्केवलान् भजन् ।।
विद्वान् यमों का सर्वदा सेवन करे, नियमों का नित्य सेवन न करे । यमों के सेवन को नहीं करता हुआ केवल नियमों का ही सेवन करने वाला पतित (ध्रष्ट-नीच) होता है।
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