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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 202
यानशय्यासनान्यस्य कूपोद्यानगृहाणि च । अदत्तान्युपयुञ्जान एनसः स्यात्तरीयभाक्‌ ।।
(दूसरों के) सवारी (गाड़ी, रथ और घोड़ा आदि), शय्या (चारपाई, पलंग और चौकी आदि) आसन, कूँआ, उद्यान (बगीचा, फुलवाड़ी आदि) और घर को बिना दिये हुये उपभोग करने वाला (उनके-- सवारी आदि के स्वामी के) चतुर्थांश पाप का भागी होता है।
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