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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 197
ये बकव्रतिनो विप्रा ये च मार्जारलिङ्गिनः । ते पतन्त्यन्धतामिस्त्रे तेन पापेन कर्मणा ।।
जो ब्राह्मण बकब्रतिक (४।१९६) तथा बैडालव्रतिक (४।१९५) हैं, वे उस पाप कर्म से 'अन्धतामिस्र' नाम के नरक में गिरते हैं।
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