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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 195
धर्मध्वजी सदालुब्धश्छाद्मिको लोकदम्भकः । बैडालव्रतिको ज्ञेयो हिंस्रः सर्वाभिसन्धकः ।।
धर्मध्वजी (अपनी प्रसिद्धि के लिये धर्मरूपी ध्वजा को फहराने वाला) लोभी कपटी, संसार को ठगने वाला (किसी के धरोहर वापस नहीं करने वाला आदि), हिंसक और दूसरों के गुण को सहन नहीं करने से उनकी निन्दा करने वाला को 'बिडालब्रतिक' कहा गया है।
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