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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 192
न वार्यपि प्रयच्छेत्तु बैडालव्रतिके द्विजे । न बकव्रतिके पापे नावेदविदि धर्मवित्‌ ।।
धर्मज्ञ गृहाश्रमी बेडालब्रतिक (४।१९५ तथा क्षे० ४।८), बकत्रतिक (४।१९६) और वेद को नहीं जानने वाले ब्राह्मण के लिये पानी भी न दे।
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