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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 191
तस्मादविद्वान्बिभियाद्यस्मात्तत््तिग्रहात्‌ । स्वल्पकेनाप्यविद्वान्हि पड़े गौरिव सीदति ।।
इस प्रकार मूर्ख ब्राह्मण जिस किसी (सुवर्ण भूमि आदि से न्यून सीसा, पीतल आदि) वस्तु का भी दान लेने से डरे (न लेवे); क्योंकि थोड़े दान के लेने से मूर्ख ब्राह्मण कीचड़ में (फँसी) गौ के समान दुःखित होता है।
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