हिरण्यमायुरन्नं च भूर्गौश्चाप्योषतस्तनुम् । अश्नश्षक्षुस्त्वचं वासो घृतं तेजस्तिलाः प्रजाः ।।
दान लेने वाले मूर्ख की सुवर्ण और अन्न आयु को, भूमि और गौ शरीर को, घोड़ा नेत्र को, वस्त्र त्वचा (चमड़े) को, घी तेल को और तिल संतानों को भस्म कर देते हैं । (मूर्ख द्वारा दान में लिये हुए ये सुवर्ण आदि उस दान लेने वाले मूर्ख की आयु आदि को भस्म अर्थात् नष्ट कर देते हैं)।
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