दासंसमूह अपनी छाया है, कन्या (पुत्री) अत्यन्त कृपापात्र है (अत: ये भी विवाद के योग्य नहीं हैं) । इस कारण इनसे तिरस्कृत होकर भी सन्ताप रहित होकर सर्वदा सहन करे, (किन्तु विवाद न करे)।
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