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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 183
जामयोऽप्सरसां लोके वैश्वदेवस्य बान्धवाः । सम्बन्धिनो ह्यापां लोके पृथिव्यां मातृमातुलौ ।।
जामि (बहन या पुत्रवधू आदि कुलख्री) अप्सरालोक का, बान्धव (मातृपक्ष वाले) वैश्वदेवलोक का, संबन्धी वरुणलोक का और माता तथा मामा भूलोक का।
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