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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 180
मातापितृभ्यां जामीभिश्रात्रा पुत्रेण भार्यया । दुहित्रा दासवर्गेण विवादं न समाचरेत्‌ ।।
माता, पिता, जामि, (बहन, पुत्रवधू आदि कुलस्री), भाई, पुत्र, स्री, पुत्री, दास-समूह से विवाद (वाक्कलह, बकवाद आदि) न करे।
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