न पाणिपादचपलो न नेत्रचपलोऽनृजुः । न स्याद्वाक्चपलश्चैव न परद्रोहकर्मधीः ।।
हस्तचपल (बिना पूछे या कहे किसी की कोई वस्तु लेना या चुराना), पादचपल (निष्प्रयोजन इधर-उधर घूमते रहना), नेत्रचपल (परस्त्री आदि को बुरी दृष्टि से देखना), कुटिल, वाक्चपल (किसी की निन्दा या व्यर्थ बकवास करना) और दूसरों के साथ द्रोह या हिंसा का विचार रखने वाला न बने।
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