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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 171
न सीदन्नपि धर्मेण मनोऽ धर्मे निवेशयेत्‌ । अधार्मिकाणां पापानामाशु पश्यन्विपर्ययम्‌ ।।
अधार्मिक पापियों के (धन-धान्यादि समृद्धि का) शीघ्र ही विपर्यय (उलटा विनाश) देखता हुआ मनुष्य धर्म के कारण दुःखित होता हुआ भी बुद्धि को कभी भी नहीं लगावे।
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