अधार्मिक पापियों के (धन-धान्यादि समृद्धि का) शीघ्र ही विपर्यय (उलटा विनाश) देखता हुआ मनुष्य धर्म के कारण दुःखित होता हुआ भी बुद्धि को कभी भी नहीं लगावे।
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