अधार्मिको नरो यो हि यस्य चाप्यनृतं धनम् । हिंसारतिश्च यो नित्यं नेहासौ सुखमेधते ।।
जो अधार्मिक (शास्त्रविरुद्ध आचरण करने वाला) है, जिसका झूठ बोलना ही धन है (जो झूठी गवाही देकर पैसा या घूस लेता है) और परपीड़न में संलग्न है; वह मनुष्य इस लोक में सुखी होकर उन्नति नहीं करता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।