क्रोध से बुद्धिपूर्वक तृण से भी ब्राह्मण का ताडन कर इक्कीस जन्म तक (ताड़नकर्ता द्विजाति भी) पाप (कुत्ते-बिल्ली आदि की) योनियों में उत्पन्न होता रहता है।
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