दूसरे के ऊपर डण्डा न उठावे तथा क्रोधकर डण्डे से न मारे और पुत्र तथा शिष्य (और भार्या तथा दास आदि) को शिक्षा देने के लिए (रज्ज्वा वेणुदलेन वा") (८।२९९) के अनुसार ताडन करे ।।
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