नास्तिक्यं वेदनिन्दां च देवतानां च कुत्सनम् । द्वेषं स्तम्भं च मानं च क्रोधं तैक्ष्ण्यं च वर्जयेत् ।।
नास्तिकता (ईश्वर-परलोकादि को न मानना), वेदनिन्दा, देवनिन्दा, द्वेष, दम्भ, अभिमान, क्रोध और क्रूरता का त्याग करे।
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