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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 159
यद्यत्परवशं कर्म तत्तद्यत्नेन वर्जयेत्‌ । यद्यदात्मवशं तु स्यात्तत्तत्सेवेत यत्नतः ।।
जो-जो पराधीन (धनादि से साध्य) कार्य है, उसका यत्नपूर्वक त्याग करे और जो-जो स्वाधीन (अपने शरीर आदि से साध्य) कार्य है, उसे यत्नपूर्वक करे।
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