दुराचारो हि पुरुषो लोके भवति निन्दितः । दुःखभागी च सततं व्याधितोऽल्पायुरेव च ।।
दुराचारी पुरुष संसार में निन्दित, सर्वदा दुःखभागी, रोगी और अल्पायु होता है।
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