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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 154
अभिवादयेद्रद्धांश्च दद्याच्चैवासनं स्वकम्‌ । कृताञ्जलिरुपासीत गच्छतः पृष्ठतोऽन्वियात्‌ ।।
(गृह पर आये हुए) बड़े-बूढ़े लोगों का अभिवादन करे, अपना आसन उनको (बैठने के लिए) दे, हाथ जोड़कर उनके सामने बैठे और उनके लौटने के समय (कुछ दूर तक) पीछे-पीछे जावे।
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