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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 144
अनातुरः स्वानि खानि न स्पृशेदनिमित्ततः । रोमाणि च रहस्यानि सर्वाण्येव विवर्जयेत्‌ ।।
स्वस्थ रहते हुए बिना कारण इन्द्रियों तथा गुप्त रोमों (कक्ष या उपस्थादि के बालों) का स्पर्श न करे।
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