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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 139
भद्रं भद्रमिति ब्रूयाद्भद्रमित्येव वा वदेत्‌ । शुष्कवैरं विवादं च न कुर्यात्केनचित्सह ।।
(दूसरे के किये हुए किसी) बुरे या बिगड़े हुए कार्य को 'अच्छा' कहे, या “अच्छा है?” ऐसा सामान्यत: कहे, बिना मतलब किसी के साथ विरोध या झगड़ा न करे।
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