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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 136
एतत्त्रयं हि पुरुषं निर्दहेदवमानितम्‌ । तस्मादेतत्त्रयं नित्यं नावमन्येत बुद्धिमान्‌ ।।
अपमानित ये तीनों (क्षत्रिय, साँप और ब्राह्मण) अपमान करने वाले पुरुष को भस्म कर देते हैं। अत: बुद्धिमान्‌ मनुष्य इनका अपमान कदापि न करे।
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