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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 130
देवतानां गुरो राज्ञः स्नातकाचार्ययोस्तथा । नाक्रामेत्कामतश्छायां बञ्नुणो दीक्षितस्य च ।।
देवप्रतिमा, गुरु (पिता आदि श्रेष्ठ जन), राजा, स्नातक, आचार्य, कपिल वर्णवाला और यज्ञ में दीक्षित मनुष्यों (अवभृथ स्नान के पूर्व तक) की छाया का इच्छापूर्वक उल्लंघन न करे।
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