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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 129
न स्नानमाचरेद्भुक्त्वा नातुरो न महानिशि । न वासोभिः सहाजस्रं नाविज्ञाते जलाशये ।।
भोजन के बाद, रोगी रहने पर, महानिशा (रात्रि के मध्य वाले दो प्रहरों) में, बहुत वस्त्र पहने हुए और आज्ञात जलाशय में (जिसमें पानी का थाह, गड्डा या पत्थर आदि और जलजन्तु आदि का रहना ठीक-ठीक मालूम न हो, उसमें) सर्वदा स्नान न करे।
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