अमावास्यामष्टमी च पौर्णमासी चतुर्दशीम् । ब्रह्मचारी भवेन्नित्यमप्यृतौ स्नातको द्विजः ।।
अमावस्या, अष्टमी पूर्णिमा और चतुर्दशी तिथियों में स्री के ऋतुकाल होने पर भी गृही द्विज ब्रह्मचारी ही रहे ।।
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