द्विज अध्ययन के समय अपवित्र (मल-मूत्र-उच्छिष्टादि से दूषित) स्थान तथा अपने शरीर की अपवित्रता - इन दो अनध्यायों का प्रयत्नपूर्वक सर्वदा त्याग करे।
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