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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 126
पशुमण्डूकमार्जारश्चसर्पनकुलाखुभिः । अन्तरागमने विद्यादनध्यायमहर्निशम्‌ ।।
(वेदाध्ययन करते समय गुरु तथा शिष्य के) बीच में गौ आदि पशु, मेढ़क; बिलार, (या बिल्ली), सर्प, नेवला और चूहा के आ जाने पर दिन-रात अनध्याय होता है।
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