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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 125
एतद्विदन्तो विद्वांसस्रयीनिष्कर्षमन्वहम्‌ । क्रमतः पूर्वमभ्यस्य पश्चाद्वेदमधीयते । ।
यह (४।१२४ श्लोकोक्त वेदत्रय के देवत्रयभाव) जानते हुए लोग तीनों वेदों के सार (प्रणव, व्याहति तथा सावित्री) को पहले क्रमश: अभ्यास कर बाद में वेदाध्ययन करते हैं।
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