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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 123
सामध्वनावृग्यजुषी नाधीयीत कदाचन । वेदस्याधीत्य बा$ प्यन्तमारण्यकमधीत्य च ।।
सामवेद की ध्वनि सुनाई पड़ते रहने पर ऋग्वेद तथा यजुर्वेद का अध्ययन कदापि न करे और वेद को समाप्त या आरण्यक (वेद का एक अंश विशेष) को पढ़कर (उस दिन-रात में दूसरे वेद का अध्ययन न करे)।
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