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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 121
न विवादे न कलहे न सेनायां न सङ्गरे । न भुक्तमात्रे नाजीर्णे न वमित्वा न शुक्तके ।।
विवाद (वाचिक कलह-गाली-गलौज आदि); कलह (दण्डादिप्रहारमारपीट), सेना और युद्ध में, भोजन करने पर (जब तक धोया हुआ हाथ न सुख जाय तब तक!) अजीर्ण होने पर, वमन करने पर और खट्टी डकार आने पर (वेदाध्ययन न करे)।
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