उपाकर्म (श्रावणी कर्म, और उत्सर्ग) (वेदोत्सर्ग ४।६१) कर्म में तीन रात (दिन-रात) का अनध्याय होतां है । मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा के बाद तीन (या चार) अष्टमी तिथियों और ऋतु के अन्त में एक दिन-रात का अनध्याय होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।