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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 118
चौरैरुपप्लुते ग्रामे सम्भ्रमे चाग्रिकारिते । आकालिकमनध्यायं विद्यात्सर्वाद्धुतेषु च ।।
ग्राम के चोर आदि के उपद्रव से युक्त होने पर, किसी प्रकार संभ्रम (घबराहट होने पर) आग लगने पर (आकाश, अन्तरिक्ष या पृथ्वी पर) कोई अद्भुत उत्पातादि होने पर 'आकालिक' (उस समय से लेकर अगले दिन तक) अनध्याय जाने।
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