प्राणि वा यदि वाऽप्राणि यत्किचिच्छाद्धिक भवेत् । तदालभ्याप्यनध्यायः पाण्यास्यो हि द्विजः स्मृतः ।।
श्राद्ध-सम्बन्धी जीव (गौ आदि) या निर्जीव (शय्या, वस्त्र, अन्न आदि) को हाथ से लेने पर भी अनाध्याय होता है; क्योंकि “ब्रह्मण पाण्यास्य' (हाथ ही है मुख जिसका ऐसा) कहा गया है।
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