नीहारे बाणशब्दे च समन्ध्ययोरेव चोभयोः । अमावास्याचतुर्दश्योः पौर्णमास्यष्टकासु च ।।
नीहार (कुहरा) गिरने पर, बाणों का शब्द होने पर, दोनों (प्रात:सायं) सन्ध्याओं, अमावस्या, चतुर्दशी, पूर्णिमा/और अष्टमी तिथियों में अध्ययन न करे।
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