एकोदिष्ट श्राद्ध का निमन्त्रण लेकर, राजा के (पुत्रादि-जन्मादि प्रयुक्त) सूतक में तथा राहु के सूतक (सूर्य-चन्द्र के ग्रहणों में) तीन दिन तक विद्वान् ब्राह्मण वेदाध्ययन न करे।
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