मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 109
उदके मध्यरात्रे च विण्मूत्रस्य विसर्जने । उच्छिष्टः श्राद्धभुक्चैव मनसाऽपि न चिन्तयेत्‌ ।।
जल में, आधी रात में मध्य रात्रि की ८ घड़ियों में', गोविन्दराज के मत से (मध्यरात्रि के दो प्रहरों में), मल-मूत्र करने में, उच्छिष्टावस्था में (भोजन के बाद जब तक मुख धोकर शुद्ध न हो जाय तब तक) और श्राद्ध के भोजन में (निमन्त्रण के समय से लेकर श्राद्ध भोजन वाली दिन-रात तक) मन से भी चिन्तन न करे (वेदाध्ययन का) सर्वथा त्याग करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें