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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 108
अन्तर्गतशवे ग्रामे वृषलस्य च सन्निधौ । अनध्यायो रुद्यमाने समवाये जनस्य च ।।
ग्राम में मृतक के रहने पर, अधार्मिक के पास में, रोने का शब्द होने पर और बहुत लोगों के (कार्यवश) एकत्रित होने पर (अनध्याय माने)।
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