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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 107
नित्यानध्याय एव स्यादग्रामेषु नगरेषु च । धर्मनैपुण्यकामानां पूतिगन्धे च सर्वशः ।।
धर्म-निपुणता के इच्छुकों के लिये ग्राम तथा नगर में नित्य अनध्याय है और दुर्गन्धि आने पर सर्वदा (विधाननिपुणता के इच्छुक तथा धर्म-निपुणता के इच्छुक दोनों के लिए) अनध्याय है।
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