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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 105
निर्घाते भूमिचलने ज्योतिषां चोपसर्जने । एतानाकालिकान्विद्यादनध्यायानृतावपि ।।
जब आकाश में उत्पातसूचक ध्वनि हो, भूकम्प हो और ग्रहों का परस्पर में संघर्ष हो; तब वर्षा ऋतु के न होने पर भी (सब समय में) आकालिक (उक्त समय में तथा अगले दिन) अनध्याय जानें ।
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