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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 104
एतांस्त्व भ्युदितानिविद्याद्यदा प्रादुष्कृताग्रिषु । तदा विद्यादनध्यायमनृतौ चाभ्रदर्शने ।।
वर्षा ऋतु में होम के लिये अग्नि को प्रज्वलित करते समय (सन्ध्या समय) एक साथ बिजली चमकने लगे, मेघ गरजने लगे और पानी भी बरसने लगे तब और अन्य ऋतुओं में केवल बादल के दिखलाई पड़ने पर भी अनध्याय (काल) जाने।
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