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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 103
विद्युत्स्तनितवर्षेषु महोल्कानां च सम्प्लवे । आकालिकमनध्यायमेतेषु मनुरब्रवीत्‌ ।।
बिजली चमकते तथा मेघ गरजते हुए पानी बरसा रहा हो, बड़ी-बड़ी उल्कायें इधर-उधर गिरती हों तो इनमें मनु ने आकालिक (उक्त समय से लेकर दूसरे दिन तक) अनध्याय कहा है।
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