वर्षा ऋतु की रात में सामान्यतः भी सुनाई पड़ने वाली (गोविन्दराज के मत से (अधिक वेग से सुनाई पड़ने वाली') और दिन में धूल उड़ाने वाली हवा के बहते रहने पर इन दोनों को अध्यापन विधि के ज्ञाता वर्षाकाल का अनध्याय कहते हैं।
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