इमान्नित्यमनध्यायानधीयानो विवर्जयेत् । अध्यापनं च कुर्वाणः शिष्याणां विधिपूर्वकम् ।।
वेदाध्ययन करने वाला शिष्य और विधिपूर्वक वेदाध्ययन करने वाला गुरु इन (४।१०२-१२७) अनध्यायों को छोड़ दे । (इन आगे निषेध किये हुए समयो में गुरु तथा शिष्य वेदों का पढ़ना छोड़ दे) ।।
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