नऋक्षवृक्षनदीनाम्नीं नान्त्यपर्वतनामिकाम् ।
न पक्ष्यहिप्रेष्यनाम्नीं न च भीषणनामिकाम् ॥
न किसी नक्षत्र या वृक्ष या नदी का नाम रखने वाली, न किसी नीची जाति या पर्वत के नाम पर उसका नाम रखने वाली, न ही किसी पक्षी, सर्प या दास के नाम पर रखने वाली, न ही वह जिसका नाम आतंक फैलाने वाला हो।
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