कुर्यादहरहः श्राद्धमन्नाद्येनोदकेन वा ।
पयोमूलफलैर्वाऽपि पितृभ्यः प्रीतिमावहन् ॥
भोजन से, जल से, दूध से, जड़ से, फल से नित्य श्राद्ध करना चाहिए जिससे पितरों को प्रसन्नता हो।
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