स सन्धार्यः प्रयत्नेन स्वर्गमक्षयमिच्छता ।
सुखं चेहेच्छताऽत्यन्तं योऽधार्यो दुर्बलेन्द्रियैः ॥
दुर्बल इन्द्रियों वाले मनुष्य जिस अवस्था को धारण नहीं कर सकते, उस अवस्था को अविनाशी स्वर्ग और इस संसार में अमर सुख की इच्छा रखने वाले को संभाल कर रखना चाहिए।
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